3 सितंबर 2019 , मेरी नींद सुबह 7 बजे खुली , और मैं लेट हो गयी थी। मम्मी मंदिर जा चुकी थी, तो अब मुझे अकेले ही जाना था। आंखे खुलने के बाद थोड़ी देर मैं वही बैठकर कुछ सोचती रही और फिर एकदम से बहुत जल्दी -जल्दी तैयार होने लगी । तेज़ - तेज़ चलकर मंदिर पहुची , भगवान के दर्शन किये और फिर........, फिर बारी थी मम्मी से बात करने की , थोड़े हिचकिचाते पर पूरे विश्वास के साथ मम्मी से जाकर सब कह दिया । मम्मी ने बिना समय लिए कहा -"नही" .. "बिल्कुल नही" । ऐसे ही मन में कुछ भी आ जाए तो करने लगोगी क्या...। मैं- नही , ऐसे ही नही , ये मेरे मन मे कई सालो से हैं । मम्मी - तोह क्या पूरे दस दिनों के लिए ...? मैं - दस दिनों के लिए नही सोचा मैंने । पर तीन दिन ही सही , शुरू तो करू , फिर देखते हैं। मम्मी - ठीक है। मम्मी - अच्छा सुन ! ... पानी तो पीयेगी न या वो भी नही ? मैं - मुस्कुराते हुए .. , हा पिऊंगी। ...